Sunday, December 6, 2009

Rishte

जीवन में कुछ रिश्तें बस यूँ ही जुड़ जाया करते हैं,
वक्त के थपेड़ों से कुछ और सुलझ जाया करते हैं,
यूँ तो कई रिश्तों के नाम हम संग लाया करते हैं
पर इस ज़मी पर कुछ बेनाम बंधन यूँ ही बंध जाया करते हैं
दुनिया के सारे रिश्तों की खूबियाँ होती हैं इस रिश्तें में
जबकि ये जुड़ जाते हैं, बस यूँ ही राह चलते में
कभी न सोचा हो , ना जाना हो इक दूजे को फ़िर भी
जाने अनजाने में बंध जाते है, इस दिल से दिल के नाते में
यूँ तो निभाने होते हैं कुछ रिश्तें, भले ये चाहे ना चाहे
बस ये ही होता है ऐसा नाता, राज़ जिसमें सभी खोल देती हैं निगाहें
फूलों की पंखड़ियों से नाज़ुक ये रिश्तें,
होते है बहुत भावुक ये रिश्तें
रहें दूर भले मानो नदिया के किनारे
पर दिल में बसते हैं धड़कन की तरह ये
रहे रुत में रंगों के लिबास ये रिश्तें
हर इक रिश्ते से ख़ास ये रिश्तें
कभी ज़िन्दगी जब यूँ ही मोड़ लेती है
सभी अपनों से नाता तोड़ देती है
पर तब भी शायद कुछ जो नहीं बदलते
होते हैं यही, कहलाते हैं जो दिल के रिश्तें
बड़ी ही मासूमियत में डूबे ये रिश्तें
हर इक स्वार्थ से होते परे ये रिश्तें
चाहत में ही दुनिया बसते ये रिश्तें
इक दूजे की मुस्कान पे निसार ये रिश्तें
नसीबवालों के संग हैं जुड़ पाते ये रिश्तें
पर होते हर दिल की चाह ये रिश्तें.


6 comments:

Prachi said...

Very Beautiful!

hricha said...

a touching poem on relationships.great work dear ,keep it up.

Unknown said...

i just have to say only one thing..
YE RISHTEY :)

Ravi Goyal said...

excellent...a poem worth reading...

Unknown said...

i am speechless ....flat

Akanksha said...

Thanks a lot friends!!!