Monday, July 27, 2020

मेरी परछाई अक्सर मुझसे ये कहा करती है
सुन तू दिन की रोशनी और मेरे संग में इतना न खो जाना
कि जब रात आए तो अकेलेपन के खौफ़ में ही गुज़र जाये
और इस सज़ा में तुझे नयी सुबह का इंतज़ार भी न रह पाये

ऐ मेरे साये तू बस ठहर जा मेरे दिन के दायरों में
है वादा गुज़र जायेंगी अँधेरी रातें तेरी चाहों में..
जाने कब जागे थे इक सुकूँ भरी नींद से
मुददतें गुज़र गईं अब कुछ याद भी नहीं...