Sunday, December 6, 2009

दिल की ख्वाहिशों का आसमां बहुत ऊँचा है,
गर न पाऊं उन ऊँचाइयों को तो क्या , सुकून की ज़मीं का इक कतरा काफ़ी है,
खुशियाँ कई मांगता है ये दिल रब से,
जो ये खुशियाँ ही हो जाएँ परायी, अपने ग़मों का साया काफ़ी है,
जीवन में कई नए लोग जुड़तें हैं, कभी रिश्तों के नाम बदल जाया करते हैं,
जो कभी नया न गुज़र पाये तो क्या, वही अपने दोस्तों का याराना काफ़ी है,
महफ़िलों में रहना हर दिल की तमन्ना होती है,
गर कभी इन साथों हो ना पा सकूँ तो क्या, साथ चलता ख़ुद का साया काफ़ी है,
दुनिया में कई लोग माँगा करते हैं लम्बी उम्र दुआओं में,
लम्बी जिंदगी इस दिल की चाहत नही, कुछेक लम्हें अपनों के संग काफ़ी है.

4 comments:

Unknown said...

This one was gud. esp last two lines.

Unknown said...

महफ़िलों में रहना हर दिल की तमन्ना होती है,
गर कभी इन साथों हो ना पा सकूँ तो क्या, साथ चलता ख़ुद का साया काफ़ी है,

alone but not lonely ...too gud.

Gaurav Bahare said...

दुनिया में कई लोग माँगा करते हैं लम्बी उम्र दुआओं में,
लम्बी जिंदगी इस दिल की चाहत नही, कुछेक लम्हें अपनों के संग काफ़ी है.

Grt work......
Lamho ko yaade nahi yaadgaar banate hain...

Atul said...

Hey Akanksha nice work! This one was specially good. I also write sometimes.. will share it some day..

And BTW, you know how I got to your blog, right?