Monday, November 30, 2009

Muskan

इस दुनिया की दिलकश बगिया में महकती बहार है इक मुस्कान
उस ईश्वर की इनायत का नायब तोहफा है इक मुस्कान
दिल से दिल का नाता जोड़ देती है इक मुस्कान
बिन कुछ कहे बहुत कुछ बोल देती है इक मुस्कान
दुश्मनी की दीवारों को तोड़ देती है इक मुस्कान
अधूरी राहों को नया निशा देती है इक मुस्कान
मुश्किल घड़ियों में हौंसला समेटती है इक मुस्कान
अंधियारों में रोशनी की छटा बिखेरती है इक मुस्कान
दिलों को सुकून, चेहरों को निखार देती है इक मुस्कान
सच पूछें तो हर दिल का ख़्वाब होती है इक मुस्कान
हर सौंदर्य का अस्तित्व होती है इक मुस्कान
बेमोल होकर भी अनमोल होती है इक मुस्कान
मोल, सामर्थ्य को जानकर इस मुस्कान के
क्यूँ हम भी आजमायें कुदरत का नज़राना इक मुस्कान
बिखेरें निःस्वार्थ, अदद, चुलबुली, निर्मल सी इक मुस्कान!! :)

2 comments:

Sweta said...

badlon ke gargarhat odhey barish ki khanakti ek muskaan,
Gam ke ghanti mein akansha bhari iss muskaan ki yeh hain ek muskaan.

Akanksha said...

bahut bahut dhanyawaad sweta!!! :)